आह! असरारुलहक कासमी!!

वजीह अहमद तसव्वुर

सीमांचल के कद्दावर कांग्रेसी नेता व किशनगंज
से सांसद मौलाना असरारुल हक कासमी का शुक्रवार की सुबह दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वे 76 वर्ष के थे। सांसद कासमी का निधन सीमांचल के लिए बहुत बड़ी क्षति है। जानकारी के मुताबिक, सांसद मौलाना असरारुल हक कासमी का 76 वर्ष की आयु में शुक्रवार तड़के दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। बताया जाता है कि गुरुवार की देर रात एक कार्यक्रम में भाग लेने के दौरान ठंड लगने से उनकी तबीयत खराब हो गयी थी।

उसके बाद उन्हें किशनगंज सर्किट हाउस में लाया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके पैतृक गांव ताराबाड़ी में सुपुर्द-ए-खाक की रस्म अदा की जायेगी। मौलाना कासमी के परिवार में तीन बेटे और दो बेटियां हैं। उनकी बेगम सलमा खातून का निधन नौ जुलाई, 2012 को हो गया था।उनका जन्म फरवरी, 1942 को हुआ था और वह वर्ष 2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर किशनगंज से चुनाव जीते थे। हालांकि, पूर्व में लोकसभा चुनाव में कई बार उन्होंने अपनी किस्मत आजमायी थी, लेकिन उन्हें शिकस्त का सामना करना पड़ा था। मरहूम कासमी की शिक्षा दारुल उलूम देवबंद में में हुई थी, जहां से उन्होंने स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की थी और वह ‘जमायत उलेमा-ए-हिंद’ के प्रदेश अध्यक्ष भी थे। वह ‘ऑल इंडिया मुसलिम पर्सनल लॉ ‘र्ड के सदस्य होने के साथ ही ‘ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल’ के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वह दारूल उलूम देवबंद के मजलिश शुरा के भी सदस्य थे। उधर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किशनगंज सांसद मौलाना असरारुल हक कासमी के निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है और अपने शोक संदेश में कहा है कि मौलाना असरारुल हक कासमी जी राजनीति में अपनी शुचिता और सरल हृदय के लिए जाने जाते थे। सामाजिक कार्यों में उनकी गहरी अभिरुचि थी औऱ वे अपने क्षेत्र में काफी लोकप्रिय थे। किशनगंज में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्थापना में उनका अहम योगदान था। उन्होंने उनकी आखरी रसूमात पूरे राजकीय सम्मान के साथ करने की घोषणा की।मौलाना लगातार दूसरी बार किशनगंज से सांसद चुने गए थे। काफी सादा जीवन जीने वाले मौलाना कासमी लगातार देश के ज्वलंत मुद्दों और मुसलमानों के समस्याओं पर संसद में और संसद के बाहर समाचारपत्रों में अपने लेखों के माध्यम से आवाज बुलंद करते रहे हैं। उन्हें कभी सांसद होने का गर्व नहीं हुआ बल्कि समाज सेवा के लिए समर्पण के भाव से वह इस पद को देखते थे यही वजह है कि हमेशा जनता के बीच रह कर उन से घुलमिल कर बातें करना और जरूरतमंदों की मदद करना वह अपना कर्तव्य समझते थे।

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