उर्दू का विरोध करके मिथिला राज्य का सपना देखना भूल जाएं: नजरे आलम

दरभंगा।। सपना में मिथिला राज्य बनाने और मिथिला में ब्रह्मणवाद को बढ़ावा देने वाले लोग ख्वाब देखना भूल जाएं। मिथिला की जो सदियों की संस्कृति रही है उसे छेड़ने या बर्बाद करने का किसी को अधिकार नहीं दिया जा सकता। इधर कुछ दिनों से कुछ लोग मिथिला के विकास और मिथिला को अलग राज्य बनाने की बात कर रहे हैं। दरअसल ये लोग मिथिला के ब्रह्मनों को मुर्ख बना रहे हैं। ये लोग आरएसएस के इशारे पर मिथिला में भी हिन्दू-मुस्लिम कर मिथिला की संस्कृति को कमजोर करने की पालिसी पर काम कर रहे हैं। मिथिला राज्य का ख्वाब देखने वाले मिथिला के मुसलमानों को छांट कर कोई भी ख्वाब देखना भूल जाएं। रही मिथिला विश्वविद्यालय के कालेजों या बिहार के किसी भी सरकारी कार्यालयों पर उर्दू में नेमप्लेट लगाने के विरोध की बात तो ऐसे लोगों को हम बताना चाहते हैं कि बिहार में उर्दू को दूसरी सरकारी भाषा की मान्यता प्राप्त है। उक्त बातें ऑल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवां के अध्यक्ष नजरे आलम ने कही। श्री आलम ने कहा कि उर्दू को अलग कर कोई भी भाषा तरक्की नहीं कर सकती। मिथिला में उर्दू का विरोध करने वाले मिथिला के ही नहीं बल्कि पूरे बिहार के दुश्मन हैं। उर्दू के विरोध से यह स्पष्ट हो जाता है कि मिथिला राज्य का ख्वाब देखने वाले ब्रह्मणवाद को बढ़ावा देकर मिथिला की संस्कृति को कमजोर करना चाहते हैं। ऐसी ओछी मानसिकता के लोग अपने किसी भी नापाक मंशा‌ में कभी कामयाब नहीं हो पाएंगे।

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