गणेश शंकर विद्यार्थी: तिलक की क्रांति और गांधी की शांति के यात्री

पुण्यतिथि विशेष
अजय कुमार
एक ऐसा पत्रकार जो क्रांतिकारी था, जो प्रतापी था जिन्होंने कलम से क्रांति लिखी और अंग्रेजी हुकूमत की लंका जलाने में अहम भूमिका निभाई। ऐसा पत्रकार जिसके  कार्यालय में भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद का गुप्त अड्डा हुआ करता था , क्रांति की रणनीति बनाई जाती थी। एक ऐसा पत्रकार जो तिलक की क्रांति से शुरू होकर गांधी की शांति  का अनुसरण करने लगा था। ऐसा पत्रकार जिसकी हत्या साम्प्रदायिक सौहार्द और भाईचारा स्थापित करने के दौरान 25 मार्च 1931 को कर दी गई।
हां, हम बात कर रहे हैं प्रताप पत्रिका के संपादक गणेश शंकर विद्यार्थी की। वही प्रताप पत्रिका जिसमें भगत सिंह के लेख छपा करते थे। वही प्रताप पत्रिका जिसका कार्यालय क्रांतिकारियों का गुप्त अड्डा हुआ करता था। वही प्रताप पत्रिका जिसमें पीड़ित, मिल-मजदूर , गरीबों के उत्पीड़न पर लेख प्रकाशित होता था जिसके परिणामस्वरूप गणेश शंकर विद्यार्थी को जुर्माना भरने के साथ साथ  जेल भी जाना पड़ता था। वही प्रताप जिसने गांधी का अनुसरण करने के लिए लोगों को जगाया।
सरल किंतु हठी स्वभाव के गणेश शंकर विद्यार्थी का जन्म इलाहाबाद के अतरसुइया में 26 अक्टूबर 1890 को हुआ था, पिता जयनारायण गरीब, धार्मिक प्रवित्ति के पर उसूलों पर चलने वाले इंसान थे।  पढ़ाई के बाद विद्यार्थी ने 1908 में कानपुर के करेंसी ऑफिस में काम किया लेकिन वहां भी अंग्रेजों से झगड़ा हो गया  फिर अध्यापन का कार्य करने लगें।
1910 में ‛सरस्वती’ में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के सहायक के रूप में नियुक्त हुए । 1911 में अभ्युदय में काम करने लगे। लेकिन 1913 में विद्यार्थी जी ने ‛प्रताप’ निकालकर एक नई क्रांति का उदय किया।  शुरू में विद्यार्थी जी ने किसानों की समस्या पर भरपूर लिखा जिसके कारण उन्हें किसान ‛प्रताप बाबा’ कहने लगे थें। विद्यार्थी जी प्रताप के प्रकाशन के बाद कुल 7 बार जेल की यात्रा की जिस दौरान माखनलाल चतुर्वेदी व बालकृष्ण शर्मा सम्पादन का जिम्मा संभालते थे।
23 मार्च 1931 को भगत सिंह की फांसी के बाद कानपुर में हिन्दू-मुस्लिम दंगे भड़क गए जिसे रोकने के लिए पत्रकारिता को हर पल जीने वाले गणेश शंकर विद्यार्थी कूद गए और दंगाइयों की भेंट चढ़ गए। 3 दिन बाद उनका पार्थिव शरीर मिला जो कि इतना फूल चुका था कि पहचान में नहीं आ रहा था।
कुछ लोग कहते हैं कि दंगा अंग्रेजों के द्वारा विद्यार्थी जी को मारने की साजिश थी । ऐसे देशभक्त पत्रकार को उनकी पुण्यतिथि पर सादर नमन !
* लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं
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