आह! अब्दुल वहाब साहब – बहुत याद आओगे

वजीह अहमद तसौवुर के कलम से ✍️

चिट्ठी न कोई संदेश जाने वह कौन सा देश

जहां तुम चले गए, जहां तुम चले गए

शाम में एक खबर ने दिल व दिमाग को ऐसा झंझोरा कि अब तक उस से बाहर नहीं निकल पाया हूँ। मास्टर अब्दुल वहाब साहब हमारे बीच नहीं रहे।पिछले कुछ महीनों से दिल्ली में उनका कैंसर का इलाज चल रहा था मगर जब मौत आई तो सारी कोशिश बेकार हो गई और वह हमेशा के लिए दुनिया को अलविदा कह दिये।
अब्दुल वहाब साहब एक हंसमुख, मिलनसार और नेक इंसान थे। वह सिमरी बख्तियार पुर में पहले इंटरनैशनल स्कूल के और फिर ग्लोबल इंग्लिश स्कूल के प्राचार्य के रूप में अपनी अलग पहचान और छाप छोड़ कर गये । बच्चों से उनका संबंध एक शिक्षक छात्र का कम बाप और बच्चों वाला अधिक था। हमारे बच्चे भी उनके विधालय में थे इस वजह से उनसे एक परिवारिक संबंध जैसा रिश्ता बना। स्कूल में कोई प्राब्लम होती हमलोगों को मशविरा के लिए तुरंत बुलाते। फिर सरकारी नौकरी हो गई और हमलोगों के बीच से वह चले गए। अपने क्षेत्र में ही नौकरी हो गई इसलिए अपने गांव महीषी प्रखंड के लक्षमिनियां में ही रहने लगे। आखिरी बार उनसे मुलाकात पिछले साल ग्लोबल स्कूल के उप प्राचार्य आबिद हुसैन के शादी के अवसर पर हुई थी।


आज जब उनके मौत की खबर मिली तो यादों के दरीचे खुल गये और उनका मुस्कान भरा चेहरा आंखों के सामने आ गया। अल्लाह उनकी मगफेरत करे और जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाये।

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