अपराध अपराध होता है उसका जाति धर्म नहीं होता

वजीह अहमद तसौवुर के कलम से ✍️

हैदराबाद की दिल दहला देने वाली घटना पुरे देश को झकझोर कर रख दिया है दरिंदगी की हद पार कर दी दरिंदों ने। अब शायद समय आ गया है कि इस जघन्य अपराध पर ठोस निर्णय लेने की जरूरत है। अफसोस यह है कि देश में जिस प्रकार से इस जघन्य अपराध की घटना बढती जा रही है और दो साल तीन साल की मासूम बच्ची से लेकर साठ – सत्तर साल की बुढी तक को हवश के पुजारी नहीं बख्श रहा है तो फिर पुरे देश को मंथन करने की जरूरत है। आखिर सोच इतनी घटया कैसे हो रही है? क्यों मानवता और संस्कार जिंदगी से नापेद हो रहा है? क्यों परिवार में अच्छे संस्कार की शिक्षा का पाठशाला जो बुढ़े बुजुर्गों से मिलता था आज खत्म होता जा रहा है, क्यों इंटरनेट के जमाने में बच्चों को इंटरटेनमेंट के लिए मोबाइल आसानी के साथ थमा दे रहे हैं और ये नन्हा दिमाग कहीं न कहीं इससे गलत सोच और अपराधिक प्रवृति और संस्कारहीन भावना की ओर बढता जा रहा है और जब लगाम देने की बारी आती है तो हम जाति, धर्म देख कर गुनाह तय करते हैं। याद रखिये अपराध अपराध होता है उसका कोई जाति, धर्म या रिश्ता नाता नहीं होता है। जब तक हम किसी गुनहगार के गुनाह को देखने की जगह पहले जाति, धर्म या रिश्तेदारी देखते रहेंगे उस वक्त तक न अपराध खत्म होगा और न हमारी सीता, मरयम या कैटरीना की इज्जत सुरक्षित रह पायेगी। आज हमारे समाज में मानवीय मूल्यों की जो गिरावट आई है उस तरफ भी झांकने की जरूरत है क्योंकि आखिरकार ये अपराधी भी हमारे समाज का हिस्सा है और हम सब अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते हैं। आज बढते अपराध पर कानून को न केवल सख्ती के साथ ईमानदारी से लागू करने और फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से जल्द सुनवाई पुरी कर सख्त सजा देने की जरूरत है बल्कि समाज और परिवार में मानवीय मूल्यों, बेहतर संस्कार और समाजिक जिम्मेदारी के एहसास का भुला हुआ सबक फिर से याद कराने की जरूरत है वर्ना हर घटना आज हमारी कल तुम्हारी बारी होती जायेगी। बकौल कवयित्री मीना कुमारी
कोई किसी का दुख-दर्द बांटता ही नहीं,
जिसको देखो इक-दूसरे को नश्तर चुभा रहा है।
नाचीज़ रिश्ते-नाते, प्यार का पतन हो रहा है,
हैवानियत बढ़ गई है, इंसा खोता जा रहा है।
इंसान क्यूँ इतना बदलता जा रहा है,
बदलता जा रहा है।
छल-कपट को अपना हथियार बनाता जा रहा है,
दीन, दुखी, लाचार को अनदेखा करता जा रहा है।
करूणा नहीं, ममता नहीं, कुछ हमदर्दी भी नहीं,
अब तो खून-खून न होकर पानी होता जा रहा है।
इंसान क्यूँ इतना बदलता जा रहा है,
बदलता जा रहा है।
#Justice_for_Priyanka_Reddy

#Rip_Priyanka_Reddy

Facebook Comments
Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

Leave a Reply