असरारुल हक कासमी के योगदान को सदियों याद रखा जाएगा

पटना 31 दिसंबर: ख्यातिप्राप्त आलिम ए दीन, राजनितिज्ञ, सैकड़ों शिक्षा संस्थान के संगरक्षक और किशनगंज के सांसद मौलाना असरारुल हक़ क़ासमी की आकस्मिक मौत से पूरा देश सदमे में है। विभिन्न जगहों पर ख़िराजे अक़ीदत पेश करने के लिए श्रधांजलि सभा का आयोजन किया जा रहा है। बिहार उर्दू अकादमी में विज़न इंटरनेशनल स्कूल सहरसा और नूर एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी दरभंगा की ओर से आयोजित सेमिनार में वक्ताओं ने बात रखी।
तआरुफ़ी कलमात पेश करते हुए नूरुस्सलाम नदवी ने कहा कि हजरत मौलाना कि हमा जेहत शख्सियत और क़ीमती ख़िदमात पूरे देश के लिए नाकाबिले फ़रामोश हैं। इसलिए ऐसी अज़ीमुल मरतबत शख्सियत की हयात और ख़िदमात से लोगों को रोशनास कराना जिंदा क़ौमों की अलामत है। मुझे खुशी है कि हम लोगों की दावत पर इतनी बड़ी तादाद में दानिशवराने मिल्लत और अकीदतमन्दान-ए-असरारुल हक़ यहां जमा हैं।
हजरत मौलाना असरारुल हक कासमी के पर्सनल असिस्टेन्ट और ऑल इंडिया तालीमी व मिल्ली फाउंडेशन के सेक्रेटरी मौलाना नौशेर अहमद ने बहुत ही तफ़सील से हजरत मौलाना से मुताल्लिक़ अहम गोशों पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि मोहतरम को सबसे ज्यादा खुशी तब हुई थी जब वह दारुल उलूम देवबंद की मजलिस-ए-शूरा के मेम्बर बनाये गए थे हालांकि इससे पहले वो मेम्बर ऑफ़ पार्लियामेंट हो चुके थे। मौलाना की शख्सियत बागो बहार थी क्या अमीर क्या गरीब सबसे सभों से खन्दा पेशानी से मिलना और जहां तक मुमकिन होता उनकी हाजत पूरी करते। मेंबर ऑफ पार्लियामेंट की हैसियत से किशनगंज हल्के में जो विकास के काम किए हैं सूरज की रोशनी की तरफ साफ़ है और सबको दिख रहे हैं। उन्होंने 300 मदरसों व मकतबों में बैतुल ख़ला और इमारत की तामीर कराई। वो तमाम मसलक के लोगों का एक जैसा एहेतराम करते थे। गिरोह बंदी मसलकी इख़्तेलाफ़ात से हमेशा गुरेज़ करते रहे। यही वजह है कि वह किशनगंज के लोगों के दिलों में बसते थे उनके आखिरी सफ़र में लाखों लोगों की मौजूदगी इस बात की अलामत है। मदरसा इस्लामिया शमशुल हुदा पटना के प्रिंसिपल मौलाना मसूद अहमद कादरी नदवी ने अपने 40 साल के साथ का तज़किरा करते हुए कहा कि मिल्लत में तालीमी बेदारी के लिए हमेशा सरगर्म ए अमल रहे। मौलाना मोहतरम आला अख़लाक़ और आला किरदार से सजे हुए थे। उनकी रेहलत से मिल्लत को काफ़ी नुकसान पहुंचा है अल्लाह उनके दर्जों को बुलंद करे।
मदरसा बदरुल इस्लाम बेगूसराय के नाज़िम ए तालीमात मौलाना मुफ्ती खालिद तैमूरी ने उनकी खुशगवार यादों और क़ीमती ख़िदमतों का तफ़सील से जिक्र किया और कहा कि वो आलिम बा-अमल थे। अल्लाह उनकी कब्र को नूर से भर दे। मअरूफ़ पत्रकार अशरफ अस्थानवी ने नूरुस्सलाम नदवी और मौलाना शाहनवाज बदर क़ासमी के जुर्रतमंदाना कदम की प्रशंसा करते हुए कहा कि इन दोनों हज़रात ने बिहार के इस माया नाज़ सपूत की क़ीमती ख़िदमात और उनकी पत्रकारिता व तालीमी कारनामों से आम लोगों को बाख़बर कराने और उस मर्द मुजाहिद को पुरजोश ख़िराज ए अकीदत पेश करते हुए उनके रोशन किए हुए चराग को बाद-ए-मुख़ालिफ़ से महफूज़ रखने के लिए जो यह ताज़ियती नशिस्त की है उसके लिए है यह हज़रात हद दर्जा क़ाबिल ए मुबारकबाद हैं। उन्होंने कहा कि मेरे मरासिम हज़रत मौलाना से तकरीबन 28 सालों से रहे हैं। बहुत ही इंकेसारी, आजिज़ी, अदब नवाज़ी और मर्दम शनासी उनके अंदर बदर्जा उत्तम मौजूद थी। बेशक उनका वक्त से पहले दुनिया से चला जाना मिल्लत के लिए बड़ा ख़सारा है।
दैनिक उर्दू इंकलाब के स्थानीय सम्पादक अहमद जावेद ने कहा कि मौलाना मोहतरम की शख्सियत जोहदे मुसलसल से इबारत थी वो नमसाअद हालात में भी हिम्मत नहीं हारते थे। बड़े ही साबिर व शाकिर इंसान थे ऐसे लोगों ख़ाल ख़ाल ही पैदा होते हैं। इससे पहले विज़न इंटरनेशनल सहरसा के सरबराह और हज़रत मौलाना असरारुल हक़ कासमी के करीबी रहे नौजवान आलिम ए दीन और विज़न इंटरनेशनल स्कूल सहरसा के डायरेक्टर शाहनवाज़ बदर क़ासमी ने सेमिनार की गर्ज़-ओ-ग़ायत पर रोशनी डालते हुए बड़ी तादाद में दनीश्वरान-ए-मिल्लत और मिल्ली व सामाजिक कार्यकर्ता की तशरीफ़ आवरी पर ख़ुशी का इज़हार करते हुए उनका इस्तेक़बाल किया। उन्होंने कहा कि मौलाना ने जो तालीमी बेदारी के लिए जो ख़िदमात अंजाम दीं हैं उसे भुलाया नहीं जा सकता।वह हम जैसे लोगों के लिए आइडियल थे हम लोग उनके मिशन और विज़न को आगे बढ़ाएंगे। आप लोग दुआएं देते रहें। दरियापुर जामा मस्जिद के इमाम और ख़तीब हज़रत मौलाना आलम कासमी ने अपने 35 साल ताल्लुकात का जिक्र करते हुए कहा कि चार बार किशनगंज पारलेमानी हलके से इलेक्शन में हारते रहे लेकिन हिम्मत नहीं हारे पांचवीं बार जब वह कामयाब हुए तो फिर छठी बार भी कामयाबी ने उनके क़दम चूमे। उनसे मेरे देरीना मरासिम रहे हैं। उनकी रेहलत से मुझे ज़ाती नुकसान पहुंचा है। अल्लाह मरहूम के दरजात को बुलंद फरमाएं। राज्य हज कमेटी के पूर्व चेयरमैन अल्हाज इलियास हुसैन उर्फ सोनू बाबू अपने देरीना मरासिम का तज़किरा करते हुए आब्दीदा हो गए। बिहार के नुमाईंदा शायर सैयद हसन नवाब हसन और हाफिज असजद अमीनी ने मंज़ूम ख़िराज-ए-अकीदत पेश किया। सेमिनार का आगाज़ हाफिज़ मोहम्मद नईम उद्दीन की तिलावते कलाम पाक से हुआ। मदरसा इस्लामिया शमशुल हुदा के पूर्व प्रिंसिपल मौलाना अबुल कलाम क़ासमी ने मौलाना मौसूफ़ को पुर ख़ुलूस ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश करते हुए कहा कि मौत-उल-आलिम मौत-उल-आलम। अल्लाह उनका नेमल बदल अता फ़रमाए। तौहीद एजुकेशनल ट्रस्ट किशनगंज के चेयरमैन मौलाना सैयद मुतिउर्रहमान सल्फ़ी ने कहा कि मौलाना की रेहलत से सीमांचल यतीम हो गया है। मेम्बर ऑफ पार्लियामेंट की हैसियत से सीमांचल खासकर अपने पार्लिमानी हल्का किशनगंज की तरक्की के लिए जो काम अंजाम दिए हैं। जलसे से ख़िताब करने वाले अहम लोगों में अवामी न्यूज़ के एडिटर अब्दुल वाहिद रहमानी, प्रदेश आर.जे.डी. यूथ का अध्यक्ष क़ारी सुहेब, बिहार प्रदेश कॉंग्रेस सेल के अध्यक्ष मिन्नत रहमानी, किशनगंज डिस्ट्रिक्ट बोर्ड के मेम्बर मुहम्मद इमरान और शहज़ाद कौसर के अतिरिक्त जामिया इमाम इब्न तैमिया के आसिफ़ तनवीर तैमी, बिहार राब्ता कमेटी के जनरल सेक्रेटरी अफ़ज़ल हुसैन का नाम क़बिल ए ज़िक्र हैं। धन्यवाद ज्ञापन विज़न इंटरनेशनल स्कूल के डायरेक्ट नईम सिद्दीक़ी ने अदा की।

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