बगदादी की मौत से मुसलमान खुश क्यों है?

वजीह अहमद तसौवुर के कलम से ✍️

आतंकवाद का पर्याय बन चुके आई एस आई एस के नेता बगदादी के मरने की खबर है। अमेरिका ने उसके मरने की सूचना दी है। इस से पहले भी कई बार उसके मरने की खबर उड़ चुकी है मगर इस बार यह खबर सही हो अल्लाह करे क्योंकि हमेशा एक रहस्य बना अलबगदादी इस्लाम के नाम पर इस्लाम धर्म के शिक्षा के विरूद्ध ही काम किया और इस्लाम को एक क्रूर धर्म के रुप में लोगों के सामने प्रस्तुत किया जबकि नबी पाक ने जंग में भी सख्ती से महिलाओं, बुढो एवं बच्चों को किसी प्रकार हानि नहीं पहुंचाने का सख्ती के साथ आदेश दिया तो फिर बिना युद्ध के बेकसूरों को कत्ल की अनुमति कैसे इस्लाम दे सकता है। अलबगदादी के अपने पांच वर्षों के आतंकी साम्राज्य में जिस विभत्स और क्रूर अंदाज में बेकसूरों को मौत के घाट उतारा गया वह कहीं से भी इस्लामी शिक्षा से मेल नहीं खाता है। ये वह जेहादी है जो मस्जिद को निशाना बनाता है, जो बेकसूरों पर अत्याचार करता है, जो हर कदम पर इस्लाम का नाम लेकर इस्लामी शिक्षा का उल्लंघन करता है और खुद को इस्लाम का प्रवर्तक मानता है। ऐसा व्यक्ति जो पुरी जिंदगी इस्लाम को बदनाम करने में लगाया उसकी मौत पर दुख जताना भी नादानी होगी इसलिए मुसलमान खुश है उसकी मौत पर।

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