बिहार के नियोजित शिक्षकों के नाम पैगाम

वजीह अहमद तसौवुर के कलम से ✍️

👉नियोजित शिक्षकों के नाम एक पैगाम

  बांझ क्या जाने प्रसव पीड़ा
जब अपनी लड़ाई दूसरे के बल पर लडियेगा तो नाकामी के सिवा किया मिलेगा?
जो शिक्षक हैं ही नहीं वह आपकी लड़ाई नहीं आपके जज्बात की भट्टी में अपनी राजनीतिक रोटी सेक रहे हैं।
याद है 18 जुलाई को गर्दनीबाग का धरना जो शांति पूर्ण चल रहा था मगर अचानक कुछ लोगों का राजनीतिक महत्वाकांक्षा हिलोरें लेने लगा और गेट पर पहुंच कर एंगिल बदल बदल कर फोटो पोस्ट होने लगा। उस दिन की असली नायिका चांदनी झा का वायरल ओडियो सुनिये सब असलियत सामने आ जायेगा। इसलिए अपनी लड़ाई शिक्षक को खुद ही लड़ना है लेकिन जो शिक्षक हैं ही नहीं वह हमारी लड़ाई क्या लड़ेंगे।वह तो बस हमारे सहारे अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति करना चाहते हैं।
🙏आप क्या सोचते हैं इस विषय पर जरूर बतायें ताकि हमारी लड़ाई को सही दिशा मिल सके। 🙏

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