कुसमी में दीनी मकतब की स्थापना

वजीह अहमद तसौवुर के कलम से ✍️

सहरसा… मदरसा या दीनी मकतब के स्थापना का  उद्देश्य इस्लाम की शिक्षाओं के माध्यम से लोगों को बेहतर इंसान बनाना है और पूरी मानवता को लाभान्वित करना है। यह उन्हें इस दुनिया में सफल होने में मदद करेगा और मरने के बाद अल्लाह के यहां भी जन्नत का हकदार बनेगा क्योंकि अल्लाह ने इस्लाम की शिक्षाओं का पालन करने में ही सफलता का राज रखा है ।

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उक्त बातें मदरसा अशरफिया तरियावां के प्राचार्य मौलाना मुजाहिरूल हक कासमी एवं मुफ्ती खालिद मसूद ने बनमा ईटहरी प्रखंड के कुसमी गांव में मदनी मकतब के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कही।

 इस अवसर पर मौलाना जिया उददीन नदवी ने कहा कि इस्लाम हमें विश्वास और पूजा के बारे में सिखाता है, यह हमें उचित तर्क, शुद्ध जीवन शैली और अच्छे चरित्र के बारे में भी सिखाता है, जिससे व्यक्ति को अच्छाई और पवित्रता के क्षेत्र में पहुंचने में मदद मिलती है। आइम्मे मसाजिद के अध्यक्ष हाफिज मुमताज रहमानी ने अपने संबोधन में इस्लामी शिक्षा की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि  हर मुसलमान पर इस्लाम की शिक्षाओं को सीखने और समझने के लिए अपने व्यस्त कार्यक्रम से कुछ समय समर्पित करना अनिवार्य है।  मुस्लिम उम्मा के बीच इस्लाम की शिक्षाओं को फैलाने का सबसे अच्छा तरीका एक संगठित मकतब (दीनी स्कूल) की स्थापना करना है और खुशी है कि मुस्लिम आबादी के एक बड़े गांव में इसकी बुनियाद पड़ है औऔर जल्द ही ये तनावर दरख्त की शक्ल अख्तियार कर लेगा।
इस अवसर पर अन्य लोगों के अलावा हाफिज गुलजार अहमद, हाफिज शकील अहमद, मौलाना मो0 अय्यूब, फिरोज आलम, मो0 अतीकुज्जमां, अनवर आलम, मुफ्ती फैयाज आलम, रागीब अंजुम, बेलाल आलम, ओजैर अहमद, रफीउज्जमा उपस्थित थे।
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