फातमी साहब ने मुसलमानों के मसायल के हल के लिए कोई आवाज़ नहीं उठाई… नजरे आलम

दरभंगा…. ( प्रेस विज्ञप्ति ) आज दिनांक- 26 जुलाई, 2019 को पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत आलॅ इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवाँ के क्षेत्रीय कार्यालय लालबाग, दरभंगा में प्रेस-काॅन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। प्रेस-काॅन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बेदारी कारवाँ के अध्यक्ष श्री नजरे आलम ने कहा कि पूर्व केन्द्रीय मंत्री अली अशरफ फातमी को मतलब परस्त, मक्कार, धोखेबाज और समय के हिसाब से पल्टी मारने वाले नेता के तौर पर आप जाँच परख सकते हैं, क्योंकि फातमी दरभंगा के वो चेहरा हैं जो यहाँ के मुस्लिम समुदाय में बेचैनी का सबब बने रहे हैं और इनका सबसे अहम कारनामा यहाँ के मुसलमानों को दो गुटों में बाँटना माना जाता रहा है। यह वही फातमी है जिन्होंने दरभंगा के मुसलमानों को अंधेरे की तरफ ढ़केलने की भरपुर कोशिशें कीं। कभी इसे फारवार्ड, बैकवार्ड में, कभी गुंडागर्दी में, कभी खुदकी पूजा में लोगों को उलझाने में कामयाब होते रहे हैं। मुसलमान यह सोच कर बर्दाश्त करता रहा कि चलिए मुस्लिम चेहरा है, लेकिन फातमी ने कभी खुदको मुसलमान नहीं माना, वह स्टेज से हमेशा कहते रहे के मैं सेक्यूलर नेता हूँ, अच्छी बात है आप सेकुलर थे, लेकिन आज आपको मुसलमानों की याद क्यों कर आ रही है? आप चाहें जो करें यह आपका निजि मामला होगा, आप पार्टी बदलें यह आपकी सियासी चाल होगी, मगर आप मुसलमानों की क्यादत का दावा करके खुदको किया बताना चाहते हैं?
फातमी चुँकि मफादपरस्त हैं और राजनीतिक परिस्थती को भाँपने में माहिर हैं, इसलिए आज इन्हें मुसलमानों की बहुत याद आ रही है। जो नेता अपनी पूरी जिंदगी मुसलमानों को किसी भी महकमें में न पनपने देने की सियासत करता रहा हो आज वह मुसलमानों का हितैषी कैसे हो सकता है। इसपर गौर करने की जरूरत है। दरअसल फातमी साहब की तरफ से यह फरेब और धोखा है जो मुसलमानों को देने की कोशिशें की जा रही हैं। फातमी साहब ने मुसलमानों के संगीन और सुलगते मसायल के हल के लिए कोई आवाज़ नहीं उठाई, बल्कि मुसलमानों को व्यक्तित्व और गुंडागर्दी में उलझाकर शिक्षा से महरूम कर दिया, इसे फारवार्ड, बैकवार्ड में बाँटा, मुसलमानों को अपने लोकसभा क्षेत्र में इस दर्जा कमजोर कर दिया कि इस 25 वर्षों में कोई भी नया बड़ा चेहरा नहीं उभर सका।
श्री आलम ने आगे कहा कि फातमी साहब जदयू0 ज्वाईन करने का एलान कर चुके हैं, सत्ता की भूख और प्यास इन्हें यहाँ तक गिरा चुकी है। वो यह शायद भूल गए हैं कि इनकी पहचान आज भी राजद से है, वो इस का सहारा न लेकर मुसलमानों का नाम जप कर मुख्यमंत्री की निगाहों में सुरखुरू होना चाहते हैं। वो समझ चुके है कि अब राजद का भविष्य खतरे में है, यादव तो पहले ही राजद का दामन छोड़ चुके हैं और मुसलमानों का रूजहान दिन ब दिन जदयू0 की तरफ बढ़ता ही चला जा रहा है, ऐसे में जरूरत थी के वक्त के नब्ज को पकड़ कर उस पार्टी का दामन थामते जहाँ सत्ता में बने रहने की इन्की लालसा पूरी हो सकती है। वही मुख्यमंत्री जिन्हें फातमी साहब 15 वर्षों से गालियाँ देते आए थे, अब उसी मुख्यमंत्री के बारे में पूरे देश के सबसे बेहतरीन मुख्यमंत्री की रट लगाए हुए हैं। आखिर ऐसा किया हुआ? फातमी साहब के सुर अचानक क्यों बदल गए?
मेरा मानना है कि फातमी साहब जदयू0 में जाकर खुदकी सियासी ताकत तो बढ़ा सकते हैं मगर इस की वजह से जदयू0 को कितना फायदा होगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा। फातमी के जदयू0 में जाने से मुसलमानों के बीच जो जदयू0 की छवि अबतक ठीक ठाक है उसपर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में हम आॅल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवाँ की ओर से मुसलमानों और राज्य सरकार (विशेष रूप से जदयू0) से अपील करते हैं कि ऐसे नेता का समर्थन करने से पहले ठंडे मन से सोचना चाहिए और फिर किसी नतीजा पर पहुँचना चाहिए।
जनता के नाम हमारा संदेश:-
1-  फातमी ने अपनी पूरी जिंदगी में मुसलमानों के लिए कोई भी कल्याणकारी काम नहीं किया है।
2- पूरे देश में माॅबलिंचिंग के नाम पर दलित-मुस्लिम की हत्याएँ हो रही हैं, बिहार में भी इन दिनों लिंचिंग
की घटनाएँ सामने आई, किया फातमी की एक बार भी जुबान नहीं खुली है।
3-  फातमी ही वह राजनीतिक नेता है जिसने आपको जात-पात में उलझाया है।
4-  हाँ वो फातमी ही है जिसने हर जगह अपने गुंडे छोड़ रखे हैं, जो आप से आप की जान व माल, इज्जत
आबरू का सौदा करता है।
5-  फातमी के पालतु गुंडे और दलालों की ही वजह कर शहर का कोई मुस्लिम खानदान इस दरभंगा शहर में
उभर न सका।
6-  फातमी ही वह नेता है जिसने दरभंगा शहर के सिटिंग विधायक सुलतान अंसारी का टिकट कटवाया।
7-  देश के हालात बदलते रहे, मुसलमानों पर हमेशा से ही तरह तरह के गंभीर आरोप लगाए गए, इसे मारा
गया, दहशतगर्द कहकर शहर से उठवाया गया, किया आप को कभी याद है कि फातमी साहब ने कभी
इसके विरोध में कभी जुबान खोली हो, मुसलमानों के समर्थन में कोई विरोध प्रदर्शन में हिस्सा ही लिया
हो।
8-  जितने भी मुस्लिम नाम इस शहर में सियासत में उभरे, या तो वह गायब हो गए या फातमी साहब ने उसे
कभी भी टिकट हासिल करने न दिया। कोई मुस्लिम चेहरा अगर केवटी, जाले, दरभंगा शहर, हायाघाट, ग्रामीण (सदर), बहादुरपुर विधानसभा क्षेत्रों से खड़ा भी हुआ तो उसे फातमी लाॅबी के बल पर हरा दिया गया।
9-  कोई भी मुस्लिम व्यक्ति अगर जदयू0 ज्वाईन करता था तो फातमी साहब उसे भाजपा का एजेंट कहते थे, तो आज हम उन्हें क्यों न भाजपा एजेंटों का सरदार कहें।
10-  फातमी मुसलमानों के लिए वो जख्म है और जिसे फाड़ा और बहाया ही जा सकता है, इसे पाल कर रखना अंग के लिए घातक है।
राज्य सरकार के नाम पैगाम (विशेष रूप से जदयू0 के नाम) एवं मुख्यमंत्री के नामः-
1-  जदयू0 की छवि मुसलमानों के बीच बेहतर होती जा रही है, तो क्यों इसे खराब करने की खुद से कामयाब कोशिश की जा रही है, फातमी जो अपनी कौम, अपनी पार्टी का न हुआ वो आप का क्यों कर हो सकता है।
2-  अगर फातमी को पार्टी में लेना मुस्लिम सियासत है तो बंद कर दिजिए ऐसी सियासत और शुरू किजिए ऐसी सियासत जिससे मुसलमान और पार्टी दोनों मजबूत हों।
3-  अगर जदयू0 में मुस्लिम चेहरा ही लेना है तो 12-13 वर्षों से जो कार्याकत्र्ता पार्टी के लिए काम कर रहा है जैसे दरभंगा नगर निगम के उप-महापौर बदरूज्जमा खान उर्फ बाॅबी खान और भी मुस्लिम चेहरा हैं उन्हें पार्टी में सही जगह और क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए।
4-  फातमी के जदयू0 में जाने से मुस्लिम वोटर्स जदयू0 और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से नाराज हो जायेंगे और इसका परिणाम 2020 के विधानसभा चुनाव में देखने को मिलेगा।
5-  जदयू0 को इस पर भी गौर करना चाहिए कि मुस्लिम चेहरों को अगर पार्टी में जगह देनी है तो ऐसे लोगों को जगह दी जाए जिसने समाज एवं कौम-व-मिल्लत के लिए अच्छा काम कर रहा हो।
6-  जदयू0 एक ऐलिट क्लास पार्टी है, ठीक है आप भाजपा के साथ मिलकर सरकार चला रहे हैं, मगर आपकी पार्टी ने बिहार में अपनी अलग पहचान बनाई है वो है विकास की, आपकी सियासी जमीनें सभी धर्मों के बीच हमवार हो चुकी हैं ऐसे में एक धर्म के मानने वालों को एक व्यक्ति की वजह कर खो देना दानिशमंदी नहीं है।
अंत में हम तमाम मुसलमानों और राज्य सरकार से आप मिडिया बंधुओं के माध्यम से कहना चाहेंगे कि वह हमारी बातों पर गौर करते हुए अपने हक में फैसला लें। प्रेस-काॅन्फ्रेंस को पूर्व पार्षद नफीसुलहक रिंकु ने भी संबोधित किया।
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