सरकार मनुस्मृति लागू करना चाहती है: डॉ. रतन लाल

मुसलमान अपने लिए नहीं बल्कि देश और देश के संविधान को बचाने के लिए सड़कों पर निकले हुए है : हुजैफा रशादी
नीतीश गोडसे और सावरकर की बिचारधारा पर चल रहे हैं और बिहार वासियों के पीठ में छुरा घोप रहे हैं- नजरे आलम

 

दरभंगा: सीएए, एनपीआर और एनआरसी मुसलमानों के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह दलितों, पिछड़ों और गरीबों के खिलाफ है, यह देश के बहुसंख्यकों को मतदान के अधिकार से वंचित करके देश और देश की संपत्ति को चंद पूंजीपतियों और एक विशेष समुदाय के हाथों में देने की साजिश है। उक्त विचार दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, दलित विचारक व लेखक डॉ रतन लाल ने रखी। वह लालबाग दरभंगा में पिछले 22 दिनों से जारी अनिश्चितकालीन सत्याग्रह में जनता को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार देश के संविधान को नहीं मानती है और मन्नुस्मृति को लागू करना चाहती है। उन्होंने बिहार सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि समाजवाद का प्रतिनिधित्व करने वाले नीतीश कुमार साम्प्रदायिक शक्ति व देश को बांटने वाली शक्ति के गोद में जा बैठे हैं । उन्होंने बिहार के लोगों और युवाओं से एकजुट होकर नीतीश कुमार का विरोध करने की अपील की। प्रोफेसर रतन लाल ने महिलाओं को सत्याग्रह पर बैठने के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज देश के अंदर  सैकड़ों शाहीन बाग बन गए हैं। उन्होंने दलितों और पिछड़ों से कहा कि जितने भी शाहीन बाग हैं, वे अंबेडकरनगर और कर्पूरी नगर में करने का आवाह्न किया।
अलिगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रसंघ के सचिव हुजैफा आमिर रशादी ने काले कानून के प्रति अपना विरोध व्यक्त करते हुए कहा कि मुसलमान देश और देश के संविधान को बचाने के लिए सड़कों पर हैं और इनका इतिहास है कि जब भी देश पर कोई मुसीबत आई है। तब मुसलमान ही इसके लिए अपने जान-माल सब को निछावर कर दिया। और आज वे फिर से अपने ऐतिहास को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने नीतीश कुमार पर चुटकी लेते हुए कहा कि वह दोहरी नीति का पालन कर रहे है। एक तरफ काले कानून का समर्थन करते हैं‌ और दूसरी तरफ बिहार के लोगों को बता रहे कि बिहार में एनआरसी लागू नहीं होगा।
हुजैफा रशादी ने उन मुस्लिम नेताओं पर भी तीखा हमला किया जो आज भी नीतीश कुमार के गुणगान में लगे हुए है। वैसे लोगों का आज समाज में बहिष्कार करने की जरूरत है और ऐसे नेताओं को सबक सिखाना चाहिए।
इससे पहले मानू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष नूरुज्जोहा अमजद ने सीएए, एनपीआर और एनआरसी के बारे में विस्तार से बात करते हुए कहा कि यह कानून केवल मुसलमानों के खिलाफ नहीं है, बल्कि दलितों-पिछड़े के खिलाफ भी है। और यही वजह है कि समाज के सभी वर्ग इस लड़ाई में सड़कों पर उतरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार पर भरोसा करना सबसे बड़ी गलती होगी क्योंकि उन्होंने लोगों को बार-बार धोखा दिया है।
कवि अकमल बलरामपुरी ने कहा कि काले कानून के खिलाफ पूरे देश में गुस्से का माहौल है और सरकार इसे ताकत के बल पर कुचल देना चाहती है लेकिन देश की माताओं और बहनों ने अपनी ताकत दिखाई है और सरकार को ताकत के बल पर झुकना पड़ा है।
इससे पहले, ऑल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवां के अध्यक्ष नजरे आलम ने कहा कि गांधी लोहिया और कर्पूरी के नाम पर सरकार चलाने वाले नीतीश कुमार आज सावरकर और गोडसे का रास्ता अपना चुके हैं, और बिहार के लोगों की पीठ में छुड़ा घोपने का काम कर रहे हैं।
श्री आलम ने कहा कि नीतीश कुमार अपनी छवि सुधारने के लिए कुछ मुस्लिम क्षेत्र में छोटी-मोटी योजनाओं का सहारा लेकर खुद को सहानुभूति लेने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें वे कभी सफल नहीं होंगे। साथ ही उनके जो मुस्लिम चेले वक्ती राजनीतिक फायदे के लिए उनके नाम का माला जप रहे हैं, उन्हें जनता सबक सिखाने के लिए तैयार है। जनता ऐसे बेजमीरों को अपने बीच कभी बर्दाश्त नहीं करेगी और हर स्तर पर नीतीश कुमार व उनके चेले का विरोध किया जाएगा।
कारवां के संरक्षक शकील अहमद सलाफी ने धरनार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि ये लड़ाई लंबी है और कुर्बानी देने वाली लड़ाई है। जब तक इस काले कानून को समाप्त नहीं किया जाता तब तक लड़ाई सभी स्तरों पर जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि महिलाओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि जल्द ही देश और देश का संविधान सुरक्षित हाथों में होंगे और संविधान को मसलने वाले को जनता मसलने का काम करेगी।
सत्याग्रह का संचालन कारवां के सचिव इंजीनियर फखरुद्दीन कमर ने की। सत्याग्रह का नेतृत्व नाज़िया हसन, सबा प्रवीण, मोतीउर रहमान, हीरा निजामी, राजा खान कर रहे हैं।  इस अवसर पर ताजपुर समस्तीपुर के सामाजिक कार्यकर्ता आकील इकबाल, डॉ बदरुलहसन, बदरुलहोदा खान, अशरफ सुबहनी, एडवोकेट सफी-उर-रहमान राईन, मोहम्मद जीशान अख्तर, मोहम्मद बशर, शाहनवाज आलम, मोहम्मद बदीउज्ज़मां, सोनू, तनवीर आलम नौशाद, अबरार अहमद, मुर्तज़ा ख़ान, लोआम पंचायत के सरपंच हुमायूँ शैख, अध्यक्ष वाजिब अधिकार पार्टी विद्यानन्द राम समेत सैकड़ों की संख्या में महिलाएं एवं पुरुष उपस्थित हुए।   22वें दिन भी सत्याग्रह जारी है, लड़ाई जोरदार तरीके से लड़ी जा रही है और यह तब तक जारी रहेगी जब तक देश की तानाशाह सरकार इस काले कानून को वापस नहीं ले लेती।
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