मत्सगंधा झील : जहां मोटर बोट की जगह मोटरसाइकिल चल रही है

वजीह अहमद तसौवुर के कलम से ✍️
सहरसा नगर क्षेत्र में कोई भी ऐसी जगह नहीं है जहां दूर दराज से लोग पर्यटन के लिए आये। शायद इसी कमी को भांप कर पूर्व जिला पदाधिकारी तेज नारायण लाल दास ने 1996 में जेल के पास के उस हिस्से को जिसको श्मशान घाट के रुप में लोग जानते थे और जहां आमतौर पर लोग दिन में भी जाने से डरते थे उसको ऐसा सजा और संवार दिया कि लोग रात में भी घूमने फिरने आने लगे। सहरसा का यह विरान हिस्सा मत्सगंधा के नाम से राज्य स्तर पर प्रसिद्ध हो गया। मोटर बोटिंग का मजा इस झील में लोग लेने लगे। मंदिरों का निर्माण कर इस क्षेत्र को धार्मिक महत्व का स्थल बना दिया गया। भजन कीर्तन से माहौल भक्तिमय बना रहने लगा। पूरा क्षेत्र गुले गुलजार हो गया। दूर दूर से पर्यटक आने लगे। पर्यटन के विकास और पर्यटकों की सुविधा के लिए एक शानदार होटल का निर्माण किया गया।

मगर अफसोस यह रहा कि इसके रखरखाव पर कोई ध्यान नहीं दिया गया जिसका नतीजा यह हुआ कि अब मत्सगंधा झील में मोटरबोट की जगह साईकिल व मोटरसाइकिल चल रही है

जबकि नाव सड़क पर सूख कर आचार बन रही है ।

वैसे तो मौजूदा जिला पदाधिकारी महोदया ने नगर विकास विभाग को इस झील के मौजूदाा हाल से अवगत करा दिया है और नगर परिषद् को एस्टिमेट बना कर भेजने को कहा है ताकि इस झील का फिर से जीवनोधार हो सके और फिर मत्सगंधा की रौनक लौट सके।

मगर झील में हमेशा पानी भरा रहे इसका स्थायी निदान नहीं हो जाता उस वक्त तक यहां सुबह ऐ बनारस और शामे अवध के नजारा में खलल पड़ता रहेगा। #wajeehbhai

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