महान मुसलिम वैज्ञानिक उमर खैयाम : जिनका आज जन्मदिन है

नई दिल्ली: नीशापुर उत्तर पूर्व फारस के उस शहर का नाम था जिसको विद्ववानों का शहर कहा जाता था,जहां बड़े आलिम ऐ दीन,हकीम,साहित्यकार,इतिहासकारों ने जन्म लिया है,उनमें एक नाम ऐसा है जिसको 971 साल के बाद गूगल ने याद किया है,वो नाम फारसी के मशहूर साहित्यकार, गणितज्ञ, साहित्यकार, कवि, चिंतक और ज्योतिर्विद उमर खय्याम का।

खय्याम को उनके महान कारनामों के लिये 971 वें जन्मदिन पर एक नए कैलेंडर का आविष्कार करने वाली इस शख्सियत को याद किया है। उत्तर-पूर्वी फारस के निशापुर में जन्मे उमर खय्याम ने इस्लामिक ज्योतिष को नई पहचान दी और समय देखने का तरीका बदलते हुए इन्होंने तारीख मलिकशाही, जलाली संवत या सेल्जुक संवत की शुरुआत की।

खय्याम की कविताएं या रुबाईयां (चार लाइनों में लिखी जाने वाली खास कविता) को 1859 के बाद ही प्रसिद्धि मिली, जब अंग्रेजी कवि एडवर्ड फिज्जेराल्ड ने इनका अनुवाद किया। साहित्य के अलावा गणित में विशेष रुचि रखने वाले खय्याम ने ज्यामितीय बीजगणित की शुरुआत की और अल्जेब्रा से जुड़े इक्वेशंस के ज्यामिति से जुड़े हल प्रस्तुत किए। खय्याम के सिद्धांतों में हाइपरबोला और वृत्त जैसी ज्यामितीय रचनाओं की मदद से क्यूबिक इक्वेंशंस का हल भी शामिल है।

अंतरिक्ष और ज्योतिष से जुड़ाव के चलते उमर खय्याम ने एक सौर वर्ष (लाइट ईयर) की दूरी दशमलव के छह बिन्दुओं तक पता लगाई। खय्याम ने इस आधार पर एक नए कैलेंडर का आविष्कार किया, जिसे ईरानी शासन ने उस वक्त जलाली कैलेंडर के तौर पर लागू किया। मौजूदा ईरानी कैलेंडर का आधार भी खय्याम का जलाली कैलेंडर ही है। खय्याम ने खुरासन में मलिक शाह के सलाहकार और ज्योतिषी के तौर पर भी काम किया।

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