पाकिस्तान की शैतानी…. हिन्दुस्तान की परेशानी

वजीह अहमद तसौवुर के कलम से ✍️
भारत के वीर सपूतों ने अपनी बहादुरी के नमूने एक बार फिर दुनिया को दिखा दिये हैं। पुलवामा आतंकवादी हमले के बाद पुरे देश में जो जबरदस्त गम वो गुस्सा था आखिर उस गुस्से में कुछ राहत का एहसास हुआ जब हमारे बहादुर सैनिकों ने पाक सरहद में घुस कर उसकी औकात बता दी । हमारे वीर जवानों के हौसले को सलाम। हमें नाज है अपने वीर सैनिकों पर जो सरहदों पर जागते हैं तब हम अपने घरों में गहरी नींद सोते हैं।
यूं तो जंग किसी समस्या का समाधान नहीं है मगर शांति भी एकतरफ़ा नहीं हो सकता है । शांति के लिए पहल दोनों तरफ से होनी चाहिए क्योंकि शांति की जरूरत दोनों को है, विकास की जरूरत दोनों को है, शिक्षा की जरूरत दोनों को है, भूख से लड़ते इंसानों को रोटी की जरूरत है गोली और बारुद की नहीं। इस बात को अगर समझ कर भी ना समझ बने रहने का शौक है तो फिर अंजाम तो यही होना है। आखिर पाकिस्तान ने कश्मीर में आतंकवाद का बीज बो कर अपने देश की जनता पर कौन सा एहसान किया है जहां विकास पर पैसे खर्च होने थे, शिक्षा पर खर्च होने थे, गरीबी और बुनियादी ढांचा की मजबूती पर खर्च होने थे वह पैसा रक्षा बजट पर खर्च हो रहा है, हथियार जमा करने पर हो रहा है, आतंकवाद को बढ़ावा देने पर हो रहा है तो ऐसी स्थिति में मदद की आस में निगाहें कभी अमेरिका तो कभी सऊदी अरब और कभी चीन की तरफ उठनी लाजमी है ही मगर यह सोचने की तौफीक नहीं हुई कि जमीन के एक टुकड़े को हासिल करने की कोशिश में बर्बाद होने से बेहतर है कि जो मिल गया उसी पर सब्र कर उसको शांति के साथ विकास पथ पर इतना आगे ले जाना कि दूसरों के लिए आदर्श बन सकें। दूनिया में जापान के क्षेत्रफल से कई गुना बड़े बड़े देश मौजूद हैं मगर उनमें से बहुत का नाम लोगों को पता भी नहीं है मगर एक बहुत छोटा देश जापान जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका के जुल्मों का शिकार भी हुआ और जिसकी कीमत आज भी चुका रहा है मगर उन चीजों को भुल कर जापानियों ने अपने विकास पर ध्यान दिया और दुनिया ने जागती आंखों से देखा कि जिस अमेरिका ने जापान पर एटम बम गिरा कर उसको तबाह करने की कोशिश की उसके भी ड्राईंग रूम में जापान के उत्पाद पहुंच गए। हकीकत यही है कि अगर पाकिस्तान शुरू से एक अच्छे और समझदार भाई व पड़ोसी बन कर रहता तो खुद भी विकास के शिखर पर पहुंच गया होता और भारत भी उस मुकाम पर होता जहां अमेरिका और चीन भी इस सुपर पावर के सामने हाथ बांधे खड़ा रहता।
शायद अब भी यह बात समझ में आ जाये तो समझेंगे कि सुबह का भटका शाम को बुद्धू घर को लौटे। #Wajeehbhai

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