इस्लामिया मिडिल स्कूल के प्रथम सत्र की पढ़ाई आरंभ के लिए कार्यक्रम आयोजित

वजीह अहमद तसौवुर के कलम से ✍️

मैं आँधियों के पास तलाश-ए-सबा में हूँ
तुम मुझ से पूछते हो मेरा हौसला क्या है ।


आज कोशी क्षेत्र की शान इस्लामिया +2 उच्च विद्यालय के प्रांगण में एक नई शुरुआत हुई। कुछ हौसलेमंद और जूनूनी युवाओं के शिक्षा के प्रति उनकी जागरूकता का परिणाम था कि इस विधालय में एक बार फिर से वर्ग 6 से पढ़ाई का आरंभ हुआ और 6-8 तक की शिक्षा इसी विधालय के प्रांगण में होगी मगर इसकी व्यवस्था का जिम्मा इन्हीं कुछ हौसले मंद युवाओं ने अपने कांधे पर उठाया है।


इस्लामिया मिडिल स्कूल के पहले शिक्षा सत्र की पढ़ाई के आरंभ के अवसर पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों के विद्वानों एवं शिक्षा प्रिय लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करा कर युवाओं के कार्यों को सराहा। कार्यक्रम का आरंभ तेलावत ए कुरान पाक से हुआ।


इस अवसर पर प्रमुख वक्ता और उर्दू दैनिक इंकलाब के बिहार ब्योरो चीफ श्री असफर फरीदी ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने दौरे गरीबी में शिक्षा की अहमियत को समझते हुए इस्लामिया हाई स्कूल की बुनियाद डाली ।
जिसका नतीजा है कि यहाँ से पढ़े हुए छात्र देश – विदेश में अच्छे ओहदे पर अपनी सेवाएं देकर इस संस्थान का नाम रौशन कर रहे हैं ।


उन्होंने इस संस्था के शिक्षा के गिरते स्तर पर चर्चा करते हुए कहा कि जिस तरह एक माँ बीमार हो जाती है तो उनका ध्यान बच्चों पर थोड़ा कम रहता , वो उस तरह अपने बच्चों को प्यार नही दे सकती जैसा सेहतमंदी के दौर में देती । अब ऐसे में उस माँ के बड़े बेटों के फ़र्ज़ है कि माँ की खिदमत करे, इलाज कराए
जैसा कि इस स्कूल के एलुमनाई ने किया है जिससे पूरी उम्मीद और भरोसा है कि आने वाले समय में इस विधालय के शिक्षा से पूरा इलाका रौशन होगा।


इस अवसर पर अपने संबोधन में कार्यक्रम में अग्रणी भूमि निभाने वाले इंजीनियर मो0 मसीहउज्जमां ने इस्लामिया उच्च विद्यालय के अतित से वर्तमान पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि अगर हमें विकास और तरक्की के रास्ते पर आगे बढ़ने की लालसा है तो शिक्षा पर ध्यान देना होगा क्योंकि शिक्षा के क्षेत्र में मुसलमानों की स्थिति काफी खराब है। उन्होंने सच्चर कमेटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि हिंदुस्तान में मुसलमानों की तालीमी स्थिति इतनी खराब है कि इस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। यह काफी हैरत और सोच का विषय है कि आज मुसलमानो की शिक्षा का प्रतिशत सिर्फ 26% है और उसमें भी उच्च शिक्षा में सिर्फ 4% मुसलमान हैं।
समारोह को संबोधित करते हुए मास्टर शाहिद अली ने कहा कि दौर कोई भी ही शिक्षा का एक अपना महत्व रहा है, हमारे बुज़ुर्गों ने बड़ी कुर्बानियां देकर इस संस्था को कायम किया।


अब फिर से यहाँ वर्ग 6-8 की पढ़ाई शुरू होने जारही जो हम सभी के लिए खुशी की बात है। उन्होंने सभी से अपील की के आप इस मुहिम में हर संभव सहायता करें और इस मिशन को सफलता के शिखर पर पहुंचाएं ।
शिक्षा में तकनीक का प्रयोग पर जोर देते हुए आमिर यजदानी ने कहा कि हम तकनीक का यहाँ बेहतर इस्तेमाल कैसे करे जिससे हम अपने बच्चों को दूसरे के मुकाबिल ज़्यादा शिक्षित कर सकें इस पर विचार करने और संजीदगी से इस पर अमल करने की जरूरत है।
इस अवसर पर प्रो0 अबुल फजल, मो0 नूर आलम, मो0 गुलाम फखरूद्दीन, पूर्व प्राचार्य मो0 मसलेह उददीन, विधालय के प्राचार्य तनवीर आलम आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए जबकि डा0 मो0 जाहिद के धन्यवाद ज्ञापन पर कार्यक्रम समाप्त हो गया ।

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