अशरफचक कब्रिस्तान में सामूहिक दुआ का आयोजन

वजीह अहमद तसौवुर के कलम से ✍️
#शबे_बारात_की_रात_
पिछले साल किए गए कर्मों का लेखा-जोखा तैयार करने और आने वाले साल की तकदीर तय करने वाली इस रात को शब-ए-बरात कहा जाता है। इस रात को पूरी तरह इबादत में गुजारने की परंपरा है। नमाज, तिलावत-ए-कुरआन, कब्रिस्तान की जियारत और मरहूमीन के लिए दुआए मगफिरत करना इस रात के अहम काम हैं।


सिमरी बख्तियार पुर के अशरफचक कब्रिस्तान में वर्षों से एक परंपरा चली आ रही है कि यहां ईशा की नमाज के बाद इस क्षेत्र के हजारों की संख्या में लोग इस कब्रिस्तान में जमा होते हैं और इस कब्रिस्तान में आराम फरमा बुजुर्ग हस्तियों जिनमें हजरत सैयद शाह गनीमत अशरफ साहब और सैयद शाह अबुल कासिम अशरफ साहब शामिल हैं के कब्रों पर अलग अलग फातेहा पढते हैं। बाद में एक संक्षिप्त कार्यक्रम होता है जिसमें तेलावत ए कुरान पाक के बाद शमशाद आलम नात ए नबी पेश करते हैं और अंत में सैयद शाह कसीम अशरफ साहब सामुहिक दुआ कराते हैं।

पुरी दुनिया में शान्ति, अमन, देश में भाईचारा और आपसी सौहार्द की मजबूती, देश की तरक्की, मुल्क व कौम की हिफाजत की दुआओं पर कार्यक्रम समाप्त हो जाता है। इस वर्ष भी आयोजित इस कार्यक्रम में मैं भी शामिल हुआ और अल्लाह से मगफिरत की दुआएं की।
अल्लाह सबको नेक रास्ते पर चलने की तौफीक अता फरमाये। आमीन

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