सूर्या हास्पिटल सहरसा के कम्पाउंडरों की मनमानी से मरीज परेशान

एक संवाददाता ✍️
सहरसा…. प्राइवेट स्पतालों की मनमानी की कहानी आये दिन सुनने और पढ़ने को मिलती है मगर आज उस मनमानी का सामना सिमरी बख्तियार पुर की ओमामा प्रवीण को भी करना पड़ा। सहरसा का एक प्रसिद्ध अस्पताल है सूर्या हास्पिटल। जहां कम्पाउंडर की मनमानी  से मरीज त्रस्त रहते हैं।
उसी सूर्या स्पताल में नेत्र रोग विशेषज्ञ डा0 के0 एस0 गुप्ता भी सप्ताह में चार दिन मरीजों को देखते हैं।
जिनसे इलाज हेतु गई मगर कम्पाउंडर के मनमानी की आज शिकार हूई सिमरी बख्तियार पुर की ओमामा प्रवीण। उन्होंने बताया कि उन्होंने 16 अप्रैल मंगलवार को मोबाइल से नंबर लगाया और अस्पताल से बताया गया कि आपका नाम 12 नम्बर पर है और दो बजे से डाक्टर साहब देखेंगे। मैं दो बजे पति के साथ अस्पताल पहुंची और अपनी बारी का इंतजार करने लगी मगर हम और हमारे साथ एक दो मरीज साथ वाले प्रतिक्षा रुम में बैठे रहे और नये नये मरीजों को तरह तरह के बहाने बहाने से दिखाया जाता रहा और नम्बर सिस्टम को अंगूठा दिखाया जाता रहा। इस पर जब हम लोगों ने  आपत्ति जताई तो एक कम्पाउंडर जो काफी मिजाज का कडा दिख रहा था उसने कहा नम्बर आयेगा तभी न देखायेंगे मगर मेरे सामने ही कोई नंदन राय थे आखिरी मरीज से एक पहले यानी 23 नम्बर के मरीज थे उनको  डाक्टर के कैबिन में भेज दिया फिर एक नया मरीज आया उसको बहाना से कि इसका पुर्जा खो गया है उसको देखा दिया और हमें इंतजार करने को कहा जाता रहा। एक रुम के केबिन में बैठा स्टाफ ने हंसते हुए एक कम्पाउंडर से कहा इनको इमर्जेंसी फीस का बता न दीजिए । जब मेरे पति ने इस पर आपत्ति किया कि नम्बर सिस्टम से दिखाईये तो एक कम्पाउंडर ने कहा कि यहां हम अपनी मर्जी से देखायेंगे आपकी मर्जी से काम नहीं करेंगे। इस बीच उस कम्पाउंडर की मनमानी से ऊब कर एक दो मरीज बिना देखाये चले गए फिर जब उस कम्पाउंडर की मनमानी बढ गई तो उसका साथी दूसरा कम्पाउंडर को बुरा लगने लगा और वह बाहर अलग जा कर बैठ गया और जब कोई मरीज उसको शिकायत करता तो वह कहता कि हम क्या करें उसी को बोलिये।  इधर अपने रोब को झाड़ता दूसरा कम्पाउंडर कुछ सुनने की जगह उल्टे चुप रहने, नहीं तो नहीं देखाने की धमकी दे देता  और इन सारे हो हंगामे के बावजूद अस्पताल का कोई जिम्मेदार एक बार भी मरीजों की परेशानी देखने नहीं आया। जबकि करीब चार वर्ष पूर्व उसी अस्पताल में इलाज हेतु गई थी तो सारे स्टाफ का बेहतर प्रदर्शन था नियम के अनुसार मरीजों को देखा जाता था। मगर आज जो सूर्या का हाल देखा और भूखे प्यासे 2 बजे से 6 बजे तक अस्पताल में रह कर भी बिना डाक्टर को दिखाये वापस होना पड़ा इसका काफी मलाल और दुख है। 
   अब सवाल यह उठता है कि इस ढिठाई से प्राईवेट अस्पतालों में मनमानी क्या उस अस्पताल के भविष्य के लिए हानिकारक नहीं है? क्या मरीज इन हरकतों से तंग आकर उस अस्पताल में इलाज कराने जायेंगे? क्या अस्पताल प्रशासन इस मामले में डा0 के एस गुप्ता के लिये काम करने वाले और पुर्जा काटने वाले दोनों कम्पाउंडरों के खिलाफ अगर सख्त कदम नहीं उठाती है तो फिर इस मामले में उसे भी भागीदार नहीं समझा जाएगा? अस्पताल के सीसीटीवी कैमरे के आज के रिकार्डिंग का अवलोकन कर के भी उन कम्पाउंडरों की मनमानी की कहानी को देखा जा सकता है। आखिर सवाल यह उठता है कि 500 रूपया फीस देने के बाद और वाजिब नम्बर पर नाम दर्ज रहने के बावजूद 30 किलोमीटर धूप में सफर कर पहुंचे मरीज को कम्पाउंडर ने मनमानी कर के डाक्टर को दिखाने नहीं दिया तो क्या अस्पताल प्रबंधक वैसे गलत स्टाफ के विरुद्ध कदम उठा कर अस्पताल की विश्वसनीयता को कायम रखेंगे या मरीजों के साथ मनमानी की छूट देंगे यह देखने वाली बात होगी।
Facebook Comments
Spread the love
  • 36
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    36
    Shares

Leave a Reply